
विगत 8 वर्षों से न्यूनतम वेतन न बढ़ा, और न ही ढाई वर्षों से संविदा वेतन
प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत लाखों अनियमित कर्मचारियों यथा संविदा, दैनिक वेतन भोगी, मानदेय, जॉब दर, अंशकालीन, आउट सोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता, समूह-समिति के माध्यम से नियोजित कर्मचारियों का वेतन प्रदेश में प्रचलित श्रम विभाग द्वारा निर्धारित की जाने वाली न्यूनतम वेतन एवं वित्त विभाग द्वारा निर्धारित की जाने वाली एकमुश्त संविदा वेतन अनुसार वृद्धि की जाती है|
इन वर्गों के कर्मचारियों के लिए वेतन नियमित कर्मचारियों मिलने वाली वेतन की आधे से भी कम वेतन निर्धारित किया जाता है| फिर भी श्रम विभाग द्वारा विगत 8 वर्षों से न्यूनतम वेतन को पुनरीक्षित नहीं किया गया है, और न ही वित्त विभाग द्वारा विगत ढाई वर्षों से संविदा वेतन में वृद्धि की गई| जबकि नियमित कर्मचारियों के वेतन में नियमित वृद्धि के साथ मंहगाई भत्ते में वृद्धि की जा रही है|
प्रदेश सरकार के इस शोषणकारी सौतेला व्यव्हार से प्रदेश के 7 लाख अनियमित कर्मचारी मायूस एवं आक्रोशित है|
अनियमित कर्मचारी विगत 05 वर्ष से लेकर 25-30 साल से किसी न किसी प्रकार से शासन की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में सतत् रूप से कार्यरत हैं किन्तु विडम्बना ही है आज तक “अनियमित कर्मचारी” जैसे शब्दों से तिरस्कृत हैं। वर्तमान में इनकी स्थिति मध्यकालीन बन्धुआ मजदूर से भी बदतर है। पारिवारिक जिम्मेदारी, आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी, प्रशासनिक दबाव के कारण अपने विरुद्ध हो रहे अन्याय को सहने विवश हैं।
प्रदेश के श्रम विभाग ने श्रम संहिता 2019 को आधार मानते हुए न्यूनतम में 2017 के बाद से न्यूनतम वेतन को पुनरीक्षित नहीं किया गया है, इसी प्रकार भारत सरकार के लेबर ब्यूरो शिमला द्वारा प्रकाशित सूचकांक को आधार मानते हुए न्यूनतम वेतन के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं की गई है, जबकि नियमित कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में निरंतर वृद्धि की जा रही है|
वर्तमान सरकार के मंत्रियों का झूठा समर्थन : अपने अधिकार के लिए संघर्षरत अनियमित कर्मचारियों के मंच पर (चुनाव पूर्व) भारतीय जनता पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता/जनप्रतिनिधियों ने हमारे मंच में आकर हमारी समस्याओं को सुना तथा अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर इनका यथाशीघ्र निराकरण करने की बात कही है।
मोदी की गारंटी एक छलावा : छत्तीसगढ़ के लिए मोदी की गारंटी 2023 पत्र के “वचनबद्ध सुशासन” अंतर्गत बिंदु क्र. 2 में एक कमिटी गठित कर कमेटी में अनियमित कर्मचारियों को सम्मिलित करते हुए समीक्षात्मक प्रक्रिया प्रारंभ करने का उल्लेख किया है| लेकिन कमेटी गठन आदेश अनियमित कर्मचारियों का कोई उल्लेख नहीं होने एवं कमिटी में अनियमित संघो के पदाधिकारियों को सम्मिलित नहीं करने से अनियमित कर्मचारी आक्रोश में है|
सतत संपर्क का अनुरोध : मुख्यमंत्री एवं मंत्री परिषद् के वरिष्ठ सदस्यों से मिलकर अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं को रखा परन्तु अद्यतन भारतीय जनता पार्टी सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत भी सरकार अनियमित कर्मचारियों के समस्यों के निराकरण हेतु किसी भी प्रकार की पहल नहीं कर रही है|
मुख्यमंत्री का घोषणा झूठा : माननीय मुख्यमत्री द्वारा लोकसभा चुनाव के पूर्व अनियमित कर्मचारियों के समस्याओं के समाधान के लिए एक कमिटी गठन की घोषणा की परन्तु किसी प्रकार की कमेटी गठित नहीं की गई|
27 वेतन वृद्धि एवं श्रम सम्मान राशि नहीं : माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जुलाई 2023 में संविदा वेतन में 27 प्रतिशत वृद्धि एवं श्रम सम्मान भी अधिकाश कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों नहीं दिया जा रहा है|
वेतन के लाले एवं छटनी : वर्तमान में सरकार की शोषणकारी नीति के कारण अनेक विभागों के अनियमित कर्मचारियों को विगत अनेक माह से वेतन प्राप्त नहीं हो रहा है, अनेक विभागों में वर्षों से कार्यरत अनियमित कर्मचारियों की छटनी की जा रही है|
उपरोक्त के क्रम में सरकार शीघ्र ही न्यूनतम वेतन को पुनरीक्षित करें, संविदा वेतन में वृद्धि करें तथा अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण/स्थायीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यून मानदेय कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिए जाने, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन करने, आउट सोर्सिंग/ठेका/सेवा प्रदाता/समूह-समिति के माध्यम से नियोजन सिस्टम बंद कर विभाग में समायोजन हेतु आवश्यक पहल करें|




